Major Freedom Movements: गांधी जी के वे 7 आंदोलन, जिन्‍होंने दिखाया आजादी का रास्‍ता

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Major Freedom Movements: गांधी जी के वे 7 आंदोलन, जिन्‍होंने दिखाया आजादी का रास्‍ता


हाइलाइट्स

  • जानें महात्मा गांधी ने कौन-से बड़े आंदोलन किए थे
  • क्या था उनका मतलब और कैसे हुई शुरुआत?
  • जानें उन आंदोलन से जुड़े सभी जरूरी तथ्य

Azadi Ke Bade Andolan: करीब 250 वर्षों तक भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। गोपाल कृष्ण गोखले के अनुरोध पर 1915 में गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। जिसके बाद इन्‍होंने देशवासियों को संगठित कर अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसक आंदोलन छेड़ दिया। साउथ अफ्रीका में आजमाए सत्याग्रह का गांधीजी ने यहां भी बखूबी प्रयोग किया। 1857 की महान क्रांति पर काबू पा लेने वाली अंग्रेजी सरकार गांधीजी के अहिंसक आंदोलन के सामने पस्त नजर आने लगी। इसका कारण था कि कांग्रेस जो पहले सिर्फ एलीट क्लास का संगठन थी, उससे बड़े पैमाने पर आम भारतीय नागरिक जुड़ने लगे।

लोगों को लगने लगा कि कांग्रेस द्वारा चला जा रहा आंदोलन उनके हित में है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी के योगदान को शब्दों में नहीं मापा जा सकता है। उनकी नीतियां और एजेंडा अहिंसक थे और उनके शब्द लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत थे।

चंपारण सत्याग्रह
चंपारण आंदोलन भारत का पहला नागरिक अवज्ञा आंदोलन था जो बिहार के चंपारण जिले में महात्मा गांधी की अगुवाई में 1917 को शुरू हुआ था। इस आंदोलन के माध्यम से गांधी ने लोगों में जन्में विरोध को सत्याग्रह के माध्यम से लागू करने का पहला प्रयास किया जो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आम जनता के अहिंसक प्रतिरोध पर आधारित था।

खेड़ा आंदोलन
जब गुजरात का एक गाँव खेड़ा बुरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया, तो स्थानीय किसानों ने शासकों से कर माफ करने की अपील की। यहां गांधी ने एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जहां किसानों ने करों का भुगतान न करने का संकल्प लिया। उन्होंने ममलतदारों और तलतदारों के सामाजिक बहिष्कार की भी व्यवस्था की। जिसके कारण 1918 में सरकार ने अकाल समाप्त होने तक राजस्व कर के भुगतान की शर्तों में ढील दी।
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रॉलेट ऐक्ट को विरोध
देश में उठ रही आजादी की आवाज को दबाने के लिए अंग्रेजों द्वारा 1919 में रॉलेट ऐक्ट लाया गया। रॉलेट ऐक्ट को काले कानून के नाम से भी जाना जाता है। इस कानून में वायसरॉय को प्रेस को नियंत्रित करने, किसी भी समय किसी भी राजनीतिज्ञ को अरेस्ट करने के साथ ही बिना वांरट किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार देने का प्रावधान था। महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूरे देश में इसका विरोध किया गया।

असहयोग आंदोलन
महात्मा गांधी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में 1920 में असहयोग आंदोलन चलाया गया था। इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई जागृति प्रदान की। गांधी जी का मानना था कि ब्रिटिश हाथों में एक उचित न्याय मिलना असंभव है इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई और इस प्रकार असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई।
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नमक सत्याग्रह
ब्रिटिश राज के एकाधिकार के खिलाफ महात्‍मा गांधी ने नमक सत्‍याग्राह शुरू किया था, महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए सभी आंदोलनों में से नमक सत्याग्रह सबसे महत्वपूर्ण था। बता दें कि महात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 में साबरमती आश्रम जो कि अहमदाबाद स्थित है। दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था।

दलित आंदोलन
देश में फैले छुआछूत के विरोध में महात्मा गांधी ने 8 मई 1933 से छुआछूत विरोधी आंदोलन की शुरुआत की थी। यह आंदोलन पूरे देश में इस तरह फैला कि देश में काफी हद तक छुआछूत खत्‍म हो गई। इसके बाद गांधी जी ने अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना 1932 में की थी।

भारत छोड़ो आंदोलन
महत्‍मा गांधी ने अगस्त 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की, इस आंदोलन के कारण भारत छोड़ कर जाने के लिए अंग्रेजों को मजबूर किया गया। इसके साथ ही एक सामूहिक नागरिक अवज्ञा आंदोलन करो या मरो भी आरंभ किया गया, इस आंदोलन के कारण ही देश के आजादी की नींव पड़ी।



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