मोहम्मद सिराज पिता के इंतकाल के बाद 14 दिन अकेले एक कमरे में रहे थे, टूटे और फिर छा गए

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नई दिल्ली. मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) की कहानी भावनाओं से भरी है. इसमें अपनों को खोने का दर्द, हुनर को मांझने का रोमांच और सर्वोच्च स्तर पर सफलता की खुशी शामिल है. लॉर्ड्स टेस्ट में सिराज ने 8 विकेट लेकर यह साबित किया कि पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में उन्हें मिली सफलता कोई तुक्का या चांस नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने हुनर के दम पर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की थी. इस सफलता ने यह साबित कर दिया था कि सिराज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लंबे वक्त तक रूकने के लिए आए हैं.

सिराज भारतीय क्रिकेट में जिद, जुनून और गर्व की कई कहानियों में से एक हैं, जिसका जिक्र नई किताब ‘मिशन डॉमिनेशन: एन अनफिनिश्ड क्वेस्ट (Mission Domination: An Unfinished Quest) में किया गया है. इस किताब को बोरिया मजूमदार (Boria Majumdar) और कुशान सरकार ने लिखा है. इस किताब में सिराज के पिता को खोने के बाद टूटने और फिर क्रिकेट की दुनिया पर छा जाने का जिक्र है.

कोरोना प्रोटोकॉल के कारण सिराज कमरे में अकेले थे
किताब के मुताबिक, टीम इंडिया पिछले साल नवंबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई थी. कोरोना के कारण सभी खिलाड़ियों को होटल में 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया था. इसी दौरान सिराज के पिता मोहम्मद गौस (Mohammed Ghaus) का इंतकाल हो गया था. कोरोना प्रोटोकॉल के कारण टीम इंडिया का कोई भी खिलाड़ी उनके गम को साझा करने के लिए उनके कमरे में नहीं जा सकता था.

हालात ऐसे थे कि होटल के हर कमरे के बारे पुलिस का पहरा था. ताकि भारतीय खिलाड़ी किसी भी सूरत में कोरोना नियमों का उल्लंघन न करें. उन पर कैदियों जैसी नजर रखी जा रही थी. ऐसा लग रहा था कि जैसे वो  ऑस्ट्रेलिया में कोरोना वायरस फैलाने के लिए आए हैं.

सिराज को लेकर साथी खिलाड़ी डरे हुए थे
इसका नतीजा यह था कि टीम का हर खिलाड़ी पूरे दिन सिराज के साथ वीडियो कॉल के जरिए बात करते थे. सभी इस बात को लेकर घबराए हुए थे कि वो कुछ गलत ना कर ले या अपने आप को नुकसान ना पहुंचा ले. सिर्फ टीम के फिजियो नितिन पटेल को भी उनके कमरे में जाने की इजाजत दी. ऐसे में वही सिराज का दुख बांटते थे.

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सिराज ने पिता का सपना पूरा किया
किताब में आगे लिखा गया है कि यह भारतीय तेज गेंदबाज पिता के जाने से इतना ग़मजदा था कि कई मौकों पर टूट गया था. ऐसा होना लाजमी था कि क्योंकि सिराज को इस मुकाम तक लाने में उनके पिता ने खून-पसीना एक कर दिया था. सिराज का पिता से गहरा जुड़ाव था और चाहते थे कि बेटा टीम इंडिया की जर्सी पहने. यही वजह था कि सिराज टूटकर बिखरे नहीं और जब मेलबर्न में बॉक्सिंग डे टेस्ट खेलने का मौका मिला तो उसे हाथ से नहीं जाने देना चाहते थे.

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अपने टेस्ट डेब्यू से पहले वो भारत के लिए सीमित ओवर क्रिकेट में कुछ मुकाबले खेल चुके थे. लेकिन उसमें छाप नहीं छोड़ने की वजह से वो टेस्ट डेब्यू को यादगार बनाना चाहते थे और उन्होंने ऐसा ही किया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सिराज 13 विकेट झटककर रातों-रात स्टार बन गए थे. उस दौरे पर वो भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी रहे थे.

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