OPINION: खंडहर और जीर्णोद्धार के बीच; जब सीएम नरेंद्र मोदी धोलावीरा आए…

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OPINION: खंडहर और जीर्णोद्धार के बीच; जब सीएम नरेंद्र मोदी धोलावीरा आए...


यह 7 अक्टूबर 2006 का दिन था. मैं गुजरात राज्य पुरातत्व विभाग में एक निदेशक के रूप में कार्यरत था और उस विशेष दिन पर हम ASI, वडोदरा सर्कल और राज्य पुरातत्व के अधिकारी धोलावीरा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण गणमान्य व्यक्ति मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का इंतजार कर रहे थे. जो लोग नहीं जानते उनके लिए बता दूं कि 7 अक्टूबर वह दिन है जब नरेंद्र मोदी ने साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसलिए, मेरी टीम और मेरे लिए यह खुशी की बात थी कि जिस दिन उनकी शपथ के पूरे पांच साल पूरे हो रहे थे, उस दिन मुख्यमंत्री हमारे बीच थे. दरअसल, सीएम मोदी उस वक्त हड़प्पा सभ्यता से जुड़े एक स्थल धोलावीरा का निरीक्षण करने आए थे, जो अब यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध हो चुका है.

धोलावीरा का एक विशिष्ट इतिहास था लेकिन उस वक्त स्थिति बहुत बेहतर नहीं थी. यह जगह कच्छ के खादिर बेट (द्वीप) में स्थित है, जिसे साल 2000 की शुरुआत में भारत के सबसे पिछड़े जिले के तौर पर चिन्हित किया गया था. सूखा पड़ना आम बात थी और यहां तक विकास कार्य मुश्किल से पहुंचते थे. साल 1998 में एक सुपर साइक्लोन ने कच्छ के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया और फिर 26 जनवरी 2001 का दिन आया जिसने पूरे जिले को सचमुच उल्टा कर दिया. धोलावीरा भी भूकंप से बुरी तरह प्रभावित हुआ था. उस समय भी नरेंद्र मोदी कच्छ आए थे और बहुमूल्य विरासत के नुकसान पर दुख व्यक्त किया था.

साल 2006 की बात पर वापस लौटे उस दिन पुरातत्व विभाग में हमारे लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण था कि एक मुख्यमंत्री, राज्य के शीर्ष कैबिनेट मंत्रियों के साथ हमारे साथ इतना समय बिता रहा है. उन्होंने धैर्यपूर्वक पूरी क्षेत्र को देखा और उसके रखरखाव से जुड़े कई सवाल पूछे. इतने वर्षों में धोलावीरा की स्थिति में बेहतर सुधार नहीं होने पर उन्हें तकलीफ हुई. उसी जगह से एक व्यापक प्रयास शुरू हुआ जिसने धोलावीरा और उसके आसपास के इलाके की स्थितियों को बदल दिया. यहां अधिक पर्यटक आए जिसकी मदद से स्थानीय समुदायों की आजीविका में सुधार हुआ.

हमारी बातें सुनने के बाद, सीएम मोदी ने कहा, ‘हमें यहां जिन दोहरी समस्याओं का सामना करना पड़ा, वे हैं- सड़कों और पानी के कनेक्शन तक पहुंच. इन समस्याओं को दूर करने के लिए एक धोलावीरा टास्क फोर्स का गठन किया जाना चाहिए जो विकास केंद्रित मुद्दों पर काम करेगा.’ इस टास्क फोर्स ने कनेक्टिविटी और जलापूर्ति में सुधार से संबंधित सभी पहलुओं का अध्ययन किया. इसके बाद घदुली और संतालपुर से लिंक सड़कों पर काम शुरू हुआ.
इसी दौरान हमारे सामने दो समस्याएं थीं जिसके बारे में हमने सीएम मोदी को बताया. एक थी लगातार बिजली की कमी और दूसरी थी शिरानी वंध और अमरापुर के बीच ग्रेट रण में बड़ी संख्या में बिजली के तार, जिसके कारण पास के राज-हंस मर रहे थे. सीएम मोदी ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी थी और इसलिए गुजरात सरकार ने सभी तारों को भूमिगत करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू किया. यह एक कदम हजारों राजहंस और अन्य प्रवासी पक्षियों को बचा रहा है जो हर साल सर्दियों के मौसम में कच्छ आते हैं. हालांकि उस वक्त के लिए बालासर से बिजली प्राप्त करने के लिए एक विशेष ट्रांसफार्मर की व्यवस्था की गई. इसके बाद, 2008 तक धोलावीरा को उचित मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान की गई थी. यह भी व्यक्तिगत हस्तक्षेप और सीएम मोदी के लगातार फॉलो अप करने की वजह से हुआ.

हर पर्यटन स्थल को मार्गदर्शकों के एक समूह की जरूरत होती है जो वहां विभिन्न पहलुओं को जीवंत रखने में मदद कर सके. इस मामले में भी सीएम मोदी के पास एक नया आईडिया था. यह आईढिया पूर्व सैनिकों के लिए था, जो स्वस्थ थे और काम चाहते थे. गुजरात सरकार ने उनके लिए कैंप्स का आयोजन किया. सालों बाद मैंने देखा कि कैसे केवड़िया में स्थानीय लोगों को गाइड बनने के लिए ट्रेनिंग दी गई. कहने की जरूरत नहीं है, मुझे पता था कि यह विचार कहां से आया.

हमारी बैठक के दौरान सीएम मोदी ने इशारा किया कि धोलावीरा, गुजरात के स्थानीय लोगों के बीच भी उतना लोकप्रिय नहीं था और इसका एक कारण यह भी है कि बहुत से लोग नहीं जानते कि यह कहां है. इसलिए उन्होंने कहा कि वह संबंधित विभागों को राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोथल और धोलावीरा के लिए साइनेज लगाने का निर्देश देंगे. इससे लोथल और धोलावीरा तक पर्यटक आने में काफी मदद मिली.

एक और दीर्घकालिक परियोजना – धोलावीरा में संग्रहालय के लिए सीएम मोदी ने हमारी मदद की. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए राज्य के मुख्य सचिव से कम नहीं शामिल होंगे. इससे हमें काम करने का और विश्वास मिला. मैं कभी नहीं भूल सकता कि कैसे सीएम ने वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति से बातचीत करने, उनकी भलाई और उनके परिवारों के बारे में पूछा.

उस दिन सीएम मोदी ने जो कहा, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास संस्कृति और विरासत है जो दुनिया को अपनी ओर खींच सकती है. हमारी चुनौती आसपास के बुनियादी ढांचे में सुधार करना है और यह केवल स्थानीय समुदायों की भागीदारी और स्थानीय स्वाद के अनुरूप ही आ सकता है. साथ ही, पर्यटन के विकास को पर्यावरण की देखभाल से जोड़ना चाहिए. अगर धोलावीरा में अधिक पर्यटक आने से वनस्पतियों और जीवों को नुकसान पहुंचता तो यह गलत होता. यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है.’

कुछ दिन पहले, जब मैंने धोलावीरा के यूनेस्को विरासत स्थल में शामिल होने के बारे में पढ़ा, तो मेरा दिल गौरवान्वित हो गया. मैं सम्मानित महसूस कर रहा था कि मुझे इसमें किसी तरह से योगदान करने का अवसर मिला. मुझे उन अजूबों की भी याद आई जब एक सरकार इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व को प्रोत्साहित करने के लिए खुद आगे आती है. नरेंद्र मोदी ने धोलावीरा के विकास को कभी अलग-थलग करके नहीं देखा. उनके पास आसपास के बुनियादी ढांचे को विकसित करने, स्थानीय वनस्पतियों / जीवों की रक्षा करने और स्थानीय समुदायों को एक करने में वह दूरदर्शी थे. यदि हम अपनी संस्कृति और पर्यटन क्षमता का और अधिक दोहन करना चाहते हैं तो इस विचार का पालन होना चाहिए.

(यदुबीर सिंह रावत एक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् हैं जो साल 1984 से साल 2000 तक धोलावीरा के काम से जुड़े रहे. बाद में वे साल 2001 में पुरातत्व निदेशालय गुजरात राज्य में निदेशक के रूप में शामिल हुए और साल 2015 में इस पद से सेवानिवृत्त हुए.)

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